कोरोना पीड़ित की आत्मकथा हिंदी निबंध | autobiography of corona victim in hindi

कोरोना पीड़ित की आत्मकथा : दोस्तों कोरोना की बीमारी भारत के साथ ही दुनियाभर में बड़ी तेजी से फैली हुई है। आज कई लोक इस वायरस के कारण मृत्यु को प्राप्त हो रहे है। किंतु अगर सभी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना और बीमार पड़ने पर तुरंत इलाज करना इत्यादि कार्य किए जाए तो कोरोना को हराना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। 


आज के इस आर्टिकल मै हम आपके लिए एक कोरोना पीड़ित की आत्मकथा लेकर आए है। कोरोना ग्रस्त की यह आत्मकथा आपको स्कूल, कॉलेज मै निबंध लिखते समय काम आएगी।   


कोरोना पीड़ित की आत्मकथा

कोरोना पीड़ित की आत्मकथा | corona pidit ki atmakatha in hindi

(६०० शब्द)

मेरा नाम रोहित कुमार है। मेरी अपने घर के पास ही एक किराना दुकान है। कोरोना महामारी के चलते संपूर्ण देश में लॉकडाउन लगाया गया था। सभी दुकाने, रस्ते, मॉल, सिनेमाघर, बस, रेलवे, हवाई जहाज सब कुछ बंद था। लेकिन अत्यावश्यक सेवाओं में शामिल किराना दुकान, अस्पताल, मेडिकल, दूध की दुकान इत्यादि सभी खुले थे। 


मुझे भी कोरोना से डर लग रहा था। लेकिन लोगों को जरुर सामान मुहैया कराने के लिए मुझे दुकान खुली रखना आवश्यक था। मैं पूरी सावधानी के साथ काम कर रहा था। ग्राहकों से दूरी रखकर सामान दे रहा था। साथ ही समय-समय पर हाथों को सैनिटाइजर और पानी से धो रहा था। लेकिन इतनी सावधानी बरतने के बाद भी मुझे कोविड-19 हो गया। शुरुआत में तो मुझे बुखार आया, गले में दर्द और खांसी जुकाम महसूस होने लगा। मैंने तुरंत खुद को अपने परिवार से अलग कर लिया। मैं एक कमरे में अकेला रहने लगा। 


बुखार के पहले दिन मैंने अपने फैमिली डॉक्टर के पास जाकर कुछ दवाइयां ली। लेकिन फिर भी बुखार कम होने का नाम नहीं ले रहा था। फिर डॉक्टर ने मुझे कोरोना टेस्ट करने को कहा। डरते डरते मैंने कोरोना का भी टेस्ट किया और अपने घर आ गया। दोपहर में एक एंबुलेंस हमारे घर के पास आई। उसमें से 2 डॉक्टर बाहर आए उन्होंने मुझे एंबुलेंस में बिठाया और अस्पताल ले गए। मेरे साथ परिवार के सभी सदस्यों को भी आइसोलेट किया गया। जिस बात का डर था वही हुआ। मैं कोरोना की चपेट में आ चुका था। 


अस्पताल में मेरे साथ कई लोग इस बीमारी से पीड़ित थे। कुछ लोगों की बीमारी कम थी तो कुछ मुझसे भी ज्यादा भयंकर अवस्था में थे। डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारी पूरी श्रद्धा से पीड़ितों की सेवा कर रहे थे। मेरे वार्ड में कई सीरियस पेशेंट थे। डॉक्टर दिन में से दो बार आकर सभी पेशेंट को चेक किया करते थे। कर्मचारियों द्वारा सुबह का नाश्ता चाय दोपहर और रात का भोजन दिया जाता था। अस्पताल में मेरे कई दोस्त बन गए। मैं जिस से भी मिलता उससे हंस कर बात करता उन्हें धैर्य बनाए रखने की सलाह देता। लेकिन अस्पताल के मेरे कई दोस्त धैर्य हार कर मृत्यु को प्राप्त हो रहे थे यह सब देख में काफी व्यथित था। 


अस्पताल में मेरे सामने वाले बेड पर एक बूढ़ी औरत थी। लेकिन उस औरत के चेहरे पर मृत्यु का जरा भी डर नहीं था। एक बार मैंने उनसे जाकर पूछा, "माजी क्या आपको कोरोना से मृत्यु का डर नहीं लगता"? उस औरत ने हंसकर जवाब दिया, "बेटे, जीवन मरण तो ऊपरवाले के हाथ में है। इसलिए चिंता करके कोई फायदा नहीं। हमे जो भी पल मिले है उन्हें खुशी के साथ जीना चाहिए। उस औरत की यह बात सुनकर मुझे काफी आधार मिला। मै सोचने लगा जब एक बूढ़ी औरत जिसका शरीर पहलेसेही इतना कमजोर है जब वो नहीं डर रह तो मै तो हट्टा कट्टा नौजवान हूं। मुझे तो किसी से नहीं डरना चाहिए। 


कुछ ही दिनों मै वह औरत ठीक हो कर घर निकल गई। मै भी अब पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहा था। देखते ही देखते मेरे भी 15 दिन पूरे हो गए और मै और मेरा पूरा परिवार सुरक्षित घर वापस आ गए। घर आने के बाद हमारे पड़ोसियों ने हमारा तालियों तो साथ स्वागत किया। यह सब देख मेरी आंखें भर आई। मुझे खुशी हुई कि मैंने कोरोना जैसी बीमारी को हरा दिया। और यह सब हुआ सिर्फ और सिर्फ मेरे सकारात्मक नजरिए के कारण। इसलिए को भी लोग बीमार है उनसे मेरी यही सलाह है कि सकारात्मक रहे। और बिना डरे हर समस्या का सामना करे।

---समाप्त---


तो दोस्तों उम्मीद करते है की आपको कोरोना पीड़ित की आत्मकथा (autobiography of corona victim in hindi) उपयोगी साबित हुयी होगी। इस निबंध को अपने मित्रो के साथ भी जरुर शेयर करे धन्यवाद।

कोरोना पीड़ित की आत्मकथा हिंदी निबंध | autobiography of corona victim in hindi कोरोना पीड़ित की आत्मकथा हिंदी निबंध | autobiography of corona victim in hindi Reviewed by Mohit patil on मई 19, 2021 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.